Wednesday, January 15, 2020

जिम्मी

जिम्मी ने जिम्मेदारी निभाई
एक दोस्त की रस्म  निभाई
मुश्किल बक्त पर साथ में  खड़ा है
किरदार में हम इन्सानों से  बड़ा है
निहायत वह एक पालतू कुत्ता है
मगर वह दोस्ती में  इन्सानों से बड़ा है
जिम्मी आजकल बीमार है
सेवा की जिम्मी को दरकार है 

सेवा करने के लिए हम भी तैयार है     ।

Saturday, January 11, 2020

पैसा

ना दोस्त  चाहिए  ना शराब
जमाना है बेहद खराब
ना दुआ चाहिए  ना खेरात
अपन को पैसा बेहिसाब चाहिए  । ।

ना  महफिल चाहिए  ना कचहरी
ना छांव चाहिए ना तांव
अपन को धूप सुनहरी चाहिए । ।

ना आसरा चाहिए ना तबादला
ना नौकर चाहिए ना चाकरी
अपन  को  अपना पर्मानेंट रोजगार चाहिए  ।  ।

Tuesday, January 7, 2020

अकेला

अकेला अलबेला
अकेला अलबेला
हां ये सच है
अकेला आदमी मस्त है
तन्दुरूस्त है
हर चीज़ पर उसका हक है।
गरीब गृहस्थ है
पस्त व्यस्त है  ।
व्यथित है अनभिज्ञ है
कदाचित् असंतुष्ट है ।
सर्वमान्य यही सच है ।   





Sunday, January 5, 2020

अमीर

अमीर बनने की कोशिश
जीवन भर की यात्रा
जीने के लिये कितनी होनी
चाहिये पैसों की मात्रा
ना हम समझे ना हमारे गुरू
यात्रा शुरू कराके मर गये
हमारे गुरू.
अमीर बन कर अमीर बने रहने
का संघर्ष।
गरीब हो जाने का
डर हमें शान्त मन से
जिंदगी जीने नहीं  देता। 

Sunday, December 29, 2019

शान्ति

मरघट में  शान्ति है
घर घर में  क्रांति है
मोबाईल ज्ञान दे रहा
सच ये कि
भृमित कर रहा
दोस्त दोस्ती मोबाइल से हो रही
मिलने मिलाने की रस्में
शादी या श्मशान में पूरी हो रही
कैसे होगी प्रीत जब जमाना
हो पैसे का मीत  ।



Tuesday, November 26, 2019

नींद

नींद उड़ गई आज
जब सपनों पर गिरी गाज
माहौल विपरीत चल रही हवाऔ का है
सफर मुनासिब  नहीं
कम वक्त  है इन्तजार अब और नहीं
उम्मीद की हर सुबह बाकी है
मंजिल  दूर ही सही
हर दिन  कुछ कदम चलकर
थोड़ी थोड़ी दूरियां तो नापी है  ...... 

Sunday, November 24, 2019

आत्मा

आत्मा वात्मा कुछ नहीं
एक बार जो मरघट गये
लग जाता है
जीवन में खात्मा
जीते जीते तरस  गये
नैना बिन मौसम जो बरस गये
इसको बोलते है प्रताड़ना
पैदा हुये फिर थोड़े बड़े हुये
स्कूल जो गये पिटते पिटते
इन्सान हुये
इसको बोलते है निर्माण हुये
आत्मा वात्मा कुछ नहीं
एक बार जो मरघट गये
लग जाता है
जीवन में खात्मा । 

Saturday, November 23, 2019

हिसाब

जरा अपने आप से बात करो
क्या खोया क्या पाया
इसका हिसाब करो
उम्मीद अब भी बाकी
दिये में  जबतक जलती बाती है
उमर बीती भले आधी है
सांसों की डोर  जब तक साथी है
क्या खोया क्या पाया
 इसका हिसाब करो
उम्मीद अब भी बाकी है
दिये में जबतक जलती बाती है

Monday, November 11, 2019

निर्णय

जवानी में लगाया जो दांव
जम गये उससे शहर में  पांव
तरसते थे जो रहते थे गांव
खरीद लेते है  अब हर एक चीज
रहे कोई भाव
ठोकरों से मजबूत देखे मेरे ताव
जवानी में  लगाया जो दांव
जम गये शहर में मेरे पांव



इतिहास

बहुत ख्वाहिशें है
मगर पैसा कम है
इसीलिए जिन्दगी
हर कदम एक नई जंग है ।
अंधेरों की चाहतों से
 उजालों में उमंग है
बीत जायेगे संघर्षौ के पल
दर्द की हर बात हो जायेगी कल
बहुत ख्वाहिशें  है
मगर पैसा कम है
इसलिए जिन्दगी हर कदम
एक नई जंग है

Wednesday, November 6, 2019

अकेला

आज का इन्सान
रहना चाहता है अकेला
दे दो चाहे उसको घर का एक कोना
चलाना चाहता मोबाइल
वाट्सअप फेसबुक इन्स्टाराम

चाहता है अपनेआप में  खोना
आज का इन्सान
रहना चाहता है अकेला
परवरिश काम नहीं  आ रही
ज्ञान  कम पड़ रहा पालकों  का
बच्चे  संक्रमित है आज के परिवेश  से
मां बाप दुखी ये सब देख के

आज का इन्सान
बेखबर  है बेसबर है  बेईमान है
अपन आप से
मजे लेना चाहता है दुनियां के  सब
दुखी है औरो के रूआब से
आज का इन्सान
रहना चाहता है अकेला
दे दो उसे चाहे घर का एक कोना


Monday, November 4, 2019

मछलियां

मछलियाँ मौत से नहीं  डरती
एक्वेरियम रहकर भी
समुन्दर की तलाश करती
मछलियां मौत से नहीं  डरती
पल पल को जीती है
पानी के बुलबुलों सी ऊपर
पल में  गहराईयों में  चली जाती
मछलियां मौत से नहीं  डरती
बेफिक्र है बेखौफ है
अपनी  धुन में  मस्त रहती
कितने दिन की हो जिन्दगी
उमन्गो में  जीती
मछलियां मौत से नहीं  डरती।

Sunday, November 3, 2019

भोपाल मेरा सपनों का शहर

भोपाल मेरा सपनों का शहर
तुझे भी अपना बना लेगा
एक रात तो ठहर
लुभाता है प्यार जगाता है
बस जायेगा यहां की वादियों में
बितायेगा चारों पहर
भोपाल मेरा सपनों का शहर
ना बंदिशें ना सरहदें
रिश्तें प्यार के हैं
 रोजगार की सहूलियतें
सबको गले लगाता है
भोपाल  मेरा सपनों का शहर
अब तो मरना भी यहां
जीना यहां सारी उमर
ये मेरे प्यारे भोपाल  शहर 




Monday, October 28, 2019

भटकना

ना आज जी सके
ना कल
ताज की चाहत में
ना सो सके
जो मिला  उसे भोगा नहीं
जो ना मिला
उसके पीछे भागते रहे ।
कितने नादान थे
जिन्दगी भर नादानी
करते रहे     ।

Sunday, October 27, 2019

गैर

गैर कितने करीब हो गये
अपने जब रकीब हो गये ।
जब जब अपनो को दिया मौका
अपनौ ने दिया धौका
गैर कितने करीब हो गये
अपने जब रकीब हो गये । 

Saturday, October 26, 2019

अकेलापन

यहां कौन हजार साल की उम्र
लेकर बैठा  है
ना बोलकर ना मिलकर

तन्हा  कुछ साल गुजर जायेंगे
दुश्मनी  सा बक्त  बिताकर
कौन खुश हुआ
जब देखो तब दुख हुआ ।
रुठकर किसने मजा लूटा है
साला  अन्दर  से तो वो भी टूटा है
अगर हो जायेगी  बात
तो भी कट जायेगी रात
सबके  एक ना एक दिन
मरने के दिन आ जायेगे
एक दिन अर्थी  पर जायेंगे
सारी बातों के मायने
व्यर्थ  हो जायेंगे
यहां कौन हजार साल की उम्र
लेकर  बैठा है
साला भाई भाई से रूठा है
हम मुगालते में  है वो खुश हैं
वो मुगालते  है मैं  खुश हूं
हर इक अपना है
फिर भी सपना  टूटा  है   ।
यहां कौन हजार साल की
उम्र  लेकर बैठा  है   ।
कौई बताये हमें किसका
बक्त और मोहब्बत का
ठेका  है  ।



Thursday, October 24, 2019

शक्ति

माँ  है तो है रंग है
मां है तो उमंग है

मां है तो आंखें  है
आंखों  में  लाख सपने है
मां ने सिखाया प्यार  से
पराये भी अपने है
दीप है तो उनमें  उजाला है
मां ने ढेर सारा प्यार  बच्चों  में
बांट  डाला है
मां है तो जगमग दिवाली  है
खुशी  है चारों ओर खुशहाली है
ईश्वर ने मां देकर
सारी मन्नतें पूरी कर डाली  है

मां को घर में  पाकर
स्वर्ग की तमन्ना भी पूरी कर
डाली है ।
मां है तो हर दिन होली है
मां है तो हर दिन  दिवाली  है ।

Tuesday, October 22, 2019

व्यर्थ

बहुत सी बातों के अर्थ  नहीं है
बहुत से दर्द की बजह नहीं  होती
यू ही  जिन्दगी के  दिन खराब किये
 बिन आनन्द के यू ही जिये
 नादान थे परेशान  हुये
बेमतलब हैरान  हुये
एक मौका और दे जिन्दगी
जीकर दिखला देगें
हर लम्हें को जी लेगें
हर गम को पी लेगें।

दिवाली

ना प्यार  की बात कीजिए
ना उपकार की बात  कीजिए
जिससे घर और बाजार
रोशन है
सिर्फ पैसे की बात  कीजिए ।

Tuesday, October 15, 2019

किस्मत

लोग शहर छोड़ ने को  राजी है
गांव भी उजड़ रहें  हैं।
बर्फ़ भी  पिघल रही है 
पर्वत मैदान बन रहे हैं   
जमीन भी कम पड़ रही है  ।
चाद पर भी उम्मीद कम है  ।
मंगल का पता नहीं
जाये तो जाये कहाँ  ।