Wednesday, September 4, 2013

अकेला


तन्हा  छोड़  दिया अपनों ने  ना  जाने  किस बात पे ,
कि  मैं  खुद को ढूढ़ता हूँ तो  पहले सा मिलता  नहीं  हूँ।

Monday, September 2, 2013

बूढ़े  बाप की  चाहत 

बच्चे जिम्मेदारी समझते तो बुढापा बोझ  ना  लगता,
जीना कोंन  नहीं  चाहता ,
ख़ुशी  से मरने  का भी अपना मज़ा  होता।
राजनीति 

राजनीति आसान राह है, स्वार्थ साधने की ,
पैसा पावर सब मिलता  है  इसमें 
दुष्ट प्रवृति कुकर्म के उपासकओं  की भीड़  ही  नेताओं की फ़ोज  बन गयी है. 
जिसने भी चाह माना राजनीति आसान राह है स्वार्थ  साधने की ,
नेताओं  से  पूछो  समाज सेवा किसे कहते हैं ,
तो आज का नेता  कहेगा वो क्या होती है बे
हिस़ाब 

जब   मोहब्बत थी तो पैसा नहीं था ,
आज पैसा है तो मोहब्बत नहीं है,

जिन्दगी अपना हिसाब किताब बराबर  रखती  है ,

बहुत कुछ  देती है तो बहुत कुछ ले भी लेती  है.

 
संवेदनहीन

किसी सत्तरह अठारह साल के बेटे के बाप से पूछो ,
किसी पंद्रह सोलह साल की बेटी की माँ से पूछो ,
तो  कहेंगे की काश ये बच्चे मेरे जमाने के बच्चों  से होते तो  कितना अच्छा होता। 

क़िस्मत


जिन्दगी एक अभिलाषा है,
जिन्दगी एक परिभाषा है,
सवर जाये  तो दुल्हन है,
वर्ना तमाशा है
जुआ

चिंता  करना फ़िजूल  है,
क्योंकि कल क्या होगा यह हम तय नहीं कर सकते,
भविष्य के रास्ते जिन्दगी अपने आप खोलती या बंद करती है.