Tuesday, February 26, 2008

अमीर और गरीब

मेरे गरीब पिता मरने के बाद ,
अपने पीछे सच्चाई और संस्कार छोड़ गए ,
भाई बहिन रिश्ते नातेदार,
प्रेम व्यवहार आशीर्बाद छोड़ गए ,
और कुछ अपने अधूरे ख्वाब छोड़ गए ,
और अमीर दोस्त के पिता मरने के बाद,
रिश्तों मे तकरार ,
मुक़दमे की बहस छोड़ गए ,
मकान - दुकान मोटर- कार ,
नौकर चाकर और ढेर सारा रोजगार छोड़ गए ,
और सबसे ख़राब चीज
घर गृहस्थी धंधे का अधूरा हिसाब छोड़ गए ।

Monday, February 25, 2008

दहेज़ एवं चरित्रहीन पति

स्वप्न एक लड़की के ,
सिसकियों में बदल गए ,
"वर" जब नीचता के शिखर हुए,
रूप यौवन घर-आगन बिखर गए,
वो आह से ना बच पायेगा ,
वह शाप से ना बच पायेगा ,
वरदान पाये भष्मासुर वक्त के हाथों मिट गए ,
जब राम के वेष में,
लालची ब्याह रचाते गए ,
स्वप्न एक लड़की के ,
सिसकियों में बदल गए.

मिट्टी

मिट्टी हो गया मैं, घर की आरजू लिए,
और लोग मिट्टी ले गए मेरी कब्र की ,
घर बनाने के लिए ।

Sunday, February 24, 2008

बेईमान



लोगों ने ज़मीने खरीदी,
लोगों ने महलनुमा बंगले बनवाये,
लोगों ने चार -चार शादियाँ रचाई,
लोगों ने ताउम्र एशों आराम में गुजारी,
ये वे लोग थे जिन्होंने आदर्श की किताब पढी थी ,
मगर ईमानदारी इंसानियत
की अच्छी कीमत मिलने पर उसे बेच दिया.


इन्साफ

ये भी अजब इन्साफ है हमारा ,
जिन्दगी भर घर की दीवारों पर,
बैठे मच्छरों को मारते रहे ,
और घर के बाहर घूमनेवाले
मुजरिमों के सामने मुस्कराकर बगल से गुजरते रहे ,
"कितने दिलेर है हम"
ये भी अजब इन्साफ है हमारा।

जन्मदिन

गैरों की महफ़िल में रतजगे करते हैं ,
बॉस का बर्थडे सेलिब्रेट करते हैं ,
अरे ये क्या मिसाल दी मैंने ,
जिनसे रोशन है दुनिया अपनी ,
वो "दिए" तो अपने घर पर इन्तजार करते हैं .

Saturday, February 23, 2008

सच


सच सपने बेचकर
मच्छरों के साथ झुग्गी में सो रहा है,
झूठ मोबाइल लिए
मक्कारी और बदमाशी के साथ चौराहे पर घूम रहा है,
नेता ले रहे गुंडों की क्लास
और नेता आदर्शों की किताब रद्दीवाले को बेच रहा है ,
प्रेम हो गया पैसा,
पैसा हो गया प्यार, स्नेह की गंगोत्री है पैसा ,
पैसे से शुरू हुआ जीवन का व्यापार ,
इंसा हो गया बैचैन और लाचार ,
सब्जी रोटी खाता नहीं ढंग से ,
आदमी है कि बड़ा बनने की ललक में,
आदमी - आदमी को खा रहा है ।