Tuesday, November 26, 2019

नींद

नींद उड़ गई आज
जब सपनों पर गिरी गाज
माहौल विपरीत चल रही हवाऔ का है
सफर मुनासिब  नहीं
कम वक्त  है इन्तजार अब और नहीं
उम्मीद की हर सुबह बाकी है
मंजिल  दूर ही सही
हर दिन  कुछ कदम चलकर
थोड़ी थोड़ी दूरियां तो नापी है  ...... 

Sunday, November 24, 2019

आत्मा

आत्मा वात्मा कुछ नहीं
एक बार जो मरघट गये
लग जाता है
जीवन में खात्मा
जीते जीते तरस  गये
नैना बिन मौसम जो बरस गये
इसको बोलते है प्रताड़ना
पैदा हुये फिर थोड़े बड़े हुये
स्कूल जो गये पिटते पिटते
इन्सान हुये
इसको बोलते है निर्माण हुये
आत्मा वात्मा कुछ नहीं
एक बार जो मरघट गये
लग जाता है
जीवन में खात्मा । 

Saturday, November 23, 2019

हिसाब

जरा अपने आप से बात करो
क्या खोया क्या पाया
इसका हिसाब करो
उम्मीद अब भी बाकी
दिये में  जबतक जलती बाती है
उमर बीती भले आधी है
सांसों की डोर  जब तक साथी है
क्या खोया क्या पाया
 इसका हिसाब करो
उम्मीद अब भी बाकी है
दिये में जबतक जलती बाती है

Monday, November 11, 2019

निर्णय

जवानी में लगाया जो दांव
जम गये उससे शहर में  पांव
तरसते थे जो रहते थे गांव
खरीद लेते है  अब हर एक चीज
रहे कोई भाव
ठोकरों से मजबूत देखे मेरे ताव
जवानी में  लगाया जो दांव
जम गये शहर में मेरे पांव



इतिहास

बहुत ख्वाहिशें है
मगर पैसा कम है
इसीलिए जिन्दगी
हर कदम एक नई जंग है ।
अंधेरों की चाहतों से
 उजालों में उमंग है
बीत जायेगे संघर्षौ के पल
दर्द की हर बात हो जायेगी कल
बहुत ख्वाहिशें  है
मगर पैसा कम है
इसलिए जिन्दगी हर कदम
एक नई जंग है

Wednesday, November 6, 2019

अकेला

आज का इन्सान
रहना चाहता है अकेला
दे दो चाहे उसको घर का एक कोना
चलाना चाहता मोबाइल
वाट्सअप फेसबुक इन्स्टाराम

चाहता है अपनेआप में  खोना
आज का इन्सान
रहना चाहता है अकेला
परवरिश काम नहीं  आ रही
ज्ञान  कम पड़ रहा पालकों  का
बच्चे  संक्रमित है आज के परिवेश  से
मां बाप दुखी ये सब देख के

आज का इन्सान
बेखबर  है बेसबर है  बेईमान है
अपन आप से
मजे लेना चाहता है दुनियां के  सब
दुखी है औरो के रूआब से
आज का इन्सान
रहना चाहता है अकेला
दे दो उसे चाहे घर का एक कोना


Monday, November 4, 2019

मछलियां

मछलियाँ मौत से नहीं  डरती
एक्वेरियम रहकर भी
समुन्दर की तलाश करती
मछलियां मौत से नहीं  डरती
पल पल को जीती है
पानी के बुलबुलों सी ऊपर
पल में  गहराईयों में  चली जाती
मछलियां मौत से नहीं  डरती
बेफिक्र है बेखौफ है
अपनी  धुन में  मस्त रहती
कितने दिन की हो जिन्दगी
उमन्गो में  जीती
मछलियां मौत से नहीं  डरती।

Sunday, November 3, 2019

भोपाल मेरा सपनों का शहर

भोपाल मेरा सपनों का शहर
तुझे भी अपना बना लेगा
एक रात तो ठहर
लुभाता है प्यार जगाता है
बस जायेगा यहां की वादियों में
बितायेगा चारों पहर
भोपाल मेरा सपनों का शहर
ना बंदिशें ना सरहदें
रिश्तें प्यार के हैं
 रोजगार की सहूलियतें
सबको गले लगाता है
भोपाल  मेरा सपनों का शहर
अब तो मरना भी यहां
जीना यहां सारी उमर
ये मेरे प्यारे भोपाल  शहर